नई दिल्ली। अनशन के चलते अन्ना की सेहत में भले ही लगातार गिरावट आ रही हो, लेकिन उनके हौसले और जोश में कोई भी फर्क देखने को नहीं मिल रहा। सरकार और टीम अन्ना के बीच शुरू हुई बातचीत का पहला दौर तीन महत्वपूर्ण मांगों पर बेनतीजा खत्म हुआ था, जिसके बाद अन्ना ने कहा कि सरकार की नीयत में खोट है और उसकी मंशा भ्रष्टाचार मिटाने की नहीं लगती। सरकार उनके कई मुद्दे मानने के लिए तैयार हैं, लेकिन तीन मुद्दों पर नहीं मान रही। हजारे ने कहा कि उन्होंने गांवों से लेकर मंत्रालयों तक सारे अघिकारियों को लोकपाल के दायरे में लाने की मांग की है, क्योंकि भ्रष्टाचार से सबसे ज्यादा परेशानी गरीबों को होती है।
अफसर जागें
अन्ना ने कहा कि अगर देश के आईपीएस और आईएएस अघिकारी चाहें तो 10 साल में तस्वीर बदल सकते हैं। मैंने हर सरकारी दफ्तर में सिटीजन चार्टर की मांग की है, जिसमें यह लिखा हो कि कौन सा काम किस अघिकारी को और कितने समय में करना है, नहीं करने पर लोकपाल उसे दंडित कर सकता है।
इसके अलावा उनका एक प्रमुख मुद्दा राज्यों में लोकायुक्त के गठन का भी है, क्योंकि अगर लोकायुक्त नहीं बने तो इस देश से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा। इन मुद्दों पर सरकार अभी तक नहीं मानी। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिघि और अघिकारी जनता के पैसे का बंटवारा कर रहे हैं, लेकिन लोकपाल के होने से इस पर अंकुश लगेगा।
संसद में बहस, नतीजा सिफर
संसद के दोनों सदनों में बुधवार को नियम 193 के तहत भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बहस हुई। लोकसभा में भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी, जबकि राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने सरकार को वही पुराने आरोप लगाते हुए घेरने की कोशिश की।
जोशी ने वल्र्ड करप्शन इंडेक्स, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल रिपोर्ट और ग्लोबल फाइनेंशियल इंटिग्रिटी की रिपोर्टो का हवाला देते हुए सरकार को भ्रष्टाचार की हकीकत बताने की कोशिश की। राज्यसभा में जेटली ने आरोप लगाया कि देश में व्याप्त भ्रष्टाचार से समाज का एक तबका त्राहि-त्राहि कर रहा है, सरकार फिर भी चुप है। भ्रष्टाचार अब नीचे से केन्द्र में आ गया है।
अनूठा : 'अन्ना गांव'
चंदौली. उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के एक छोटे से गांव रेमा में 'अन्ना प्रेम' एक अलग आयाम ले चुका है। ग्रामीणों ने अपने गांव का नाम बदल कर 'अन्ना गांव' रखने तथा अपने नाम के आगे 'अन्ना' जोडने का फैसला किया है। गांव में अब पैदा होने वाले हर बच्चे के नाम के आगे भी 'अन्ना' जोडा जाएगा। करीब 300 की आबादी वाले रेमा गांव के निवासी जय प्रकाश ने बताया कि गांव के निवासी हर व्यक्ति ने अपने नाम के साथ अन्ना जोडने का फैसला किया है।
...और बना चालीसा
लखनऊ. अन्ना के समर्थन में 'अन्ना चालीसा' लिखा गया है तो वाराणसी में लोगों ने सामूहिक रूप से रक्तदान किया। अयोध्या में हनुमान चालीसा की तर्ज पर अन्ना चालीसा पढा जा रहा है। अन्ना चालीसा के रचयिता 30 वर्षीय आलोक हैं और उनकी इस रचना की पहली पंक्ति है, 'भ्रष्टाचारी निकट नहि आवैं, अन्ना हजारे जब नाम सुनावैं।'